कबीर ग्रंथावली (संपादक- हजारी प्रसाद द्विवेदी) पद संख्या 192 अर्थ सहित
पद: 192 व दिन कब आवैगे भाइ। जा कारनि हम देह धरि है, मिलिबौ अंगि लगाइ।। हौ जाँनूं जे हिल-मिलि खेलूँ, तन मन प्रान समाइ।। या कांमनां करौ परपूरन, समरथ हौ रांम राइ।। मांहि उदासी माधौ चाहै, चितवन रैनि बिहाइ।। सेज हमारी स्वघं भई है, जब सोऊँ तब खाइ।। यहु अरदास दासकी सुनिये, तनकी तपनि … Read more