कबीर ग्रंथावली (संपादक- हजारी प्रसाद द्विवेदी) पद संख्या 176 अर्थ सहित
पद: 176 नैंनो की करि कोठरी, पुतली पलंग बिछाय। पलकों की चिक डारि कै, पिय को लिया रिझाय।।1।। प्रियतम को पतिया लिखूं, कहीं जो होय बिदेस। तनमें, मनमें, नैनमें, ताकौ कहा संदेस।।2।। भावार्थ :- कबीर दास जी कहते हैं कि अपने निर्गुण राम रूपी प्रियतम को रिझाने के लिए मैं क्या करूंगी तो कहते हैं … Read more