कबीर ग्रंथावली (संपादक- हजारी प्रसाद द्विवेदी) पद संख्या 167 अर्थ सहित
kabir ke pad arth sahit. पद: 167 अबूझा लोग कहाँलौ बूझे बुझनहार बिचारो।। केते रामचंद्र तपसी से जिन जग यह भरमाया। केते कान्ह भये मुरलीधर तिन भी अन्त न पाया।। मच्छ-कच्छ बाराह स्वरूपी वामन नाम धराया। केते बौध भये निकलंकी तिन भी अन्त न पाया।। केतिक सिध-साधक-सन्यासी जिन बन बास बसाया। केते मुनिजन गोरख कहिये … Read more