द्वितीय प्रश्न पत्र हिंदी परीक्षा तिथि-09/06/2024
121. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है ?
(A) संतलाल दास की समाधि नगला (भरतपुर) में है।
(B) दादू पंथ में सत्संग स्थल अलख दरीबा नाम से प्रसिद्ध हुआ ।
(C) पुरोहित हरिनारायण शर्मा द्वारा संपादित सुंदर ग्रंथावली के चार भाग हैं।
(D) ज्ञानबोध रचना संत मलूकदास की है।
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Ans – (A) संतलाल दास की समाधि नगला (भरतपुर) में है।
संत लालदास का देवलोकगमन संवत 1705 (सन् 1648) में 108 वर्ष की आयु में अलवर रियासत के मेढ़े पर स्थित भरतपुर रियासत के गांव नंगला में हुआ। गांव शेरपुर में उन्हें समाधि दी गई। बाबा लालदास महाराज के मत में जीवन की पवित्रता तथा आचरण की शुद्धता परम ध्येय माना गया है।

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Ans (D) 2 1 4 3
हनुमन्नाटक हनुमान कवि द्वारा संस्कृत में रचित ‘हनुमन्नाटक’ के आधार पर हृदयराम ने सम्वत् १६२३ में हिन्दी भाषा में इसी नाम से पद्यबद्ध नाटक की रचना की। यह भगवान राम के जीवन पर आधारित धार्मिक ग्रन्थ है। श्री तारकनाथ बाली के अनुसार हृदयराम पंजाबी थे। उनके ‘हनुमन्नाटक’ को गुरु गोविन्द सिंह सदा अपने साथ रखते थे। इससे सिखों में भी इस ग्रन्थ का बड़ा सम्मान है। पूरा ग्रन्थ लगभग डेढ़ हजार छंदों में समाप्त हुआ है। इसमें सीता-स्वयंवर से लेकर राम-राज्याभिषेक तक की कथा प्रस्तुत है।
123. सामान्यतः हिन्दी प्रेमाख्यानों में नायक को बहुपत्नीवादी दिखाया गया है किंतु यह प्रेमाख्यान इसका अपवाद है
(A) पद्मावत
(B) मधुमालती
(C) चंदायन
(D) सत्यवती कथा
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उत्तर – (B) मधुमालती
पद्मावत में भी एक से अधिक पत्नी वाला नायक है मधुमालती में भी चांद आयन में भी चंदा विवाहित लोरिक से प्रेम करती है सत्यवती कथा में भी सत्यवती गंगाजी के उपरांत दूसरी पत्नी बनती हैं।
मधुमालती कथासार
कनेसर नगर के राजा सूरजभान के पुत्र मनोहर नामक एक सोए हुए राजकुमार को अप्सराएँ रातोंरात महारस नगर की राजकुमारी मधुमालती की चित्रसारी में रख आईं। वहाँ जागने पर दोनों का साक्षात्कार हुआ और दोनों एक दूसरे पर मोहित हो गए। पूछने पर मनोहर ने अपना परिचय दिया और कहा ‘मेरा अनुराग तुम्हारे ऊपर कई जन्मों का है इससे जिस दिन मैं इस संसार में आया उसी दिन से तुम्हारा प्रेम मेरे हृदय में उत्पन्न हुआ।’ बातचीत करते करते दोनों एक साथ सो गए और अप्सराएँ राजकुमार को उठाकर फिर उसके घर पर रख आईं। दोनों जब अपने अपने स्थान पर जगे तब प्रेम में बहुत व्याकुल हुए। राजकुमार वियोग से विकल होकर घर से निकल पड़ा और उसने समुद्र मार्ग से यात्रा की। मार्ग में तूफ़ान आया जिसमें इष्ट मित्र इधर उधर बह गए। राजकुमार एक पटरे पर बहता हुआ एक जंगल में जा लगा, जहाँ एक स्थान पर एक सुंदर स्त्री पलँग पर लेटी दिखाई पड़ी। पूछने पर जान पड़ा कि वह चितबिसरामपुर के राजा चित्रसेन की कुमारी प्रेमा थी जिसे एक राक्षस उठा लाया था। मनोहर कुमार ने उस राक्षस को मारकर प्रेमा का उध्दार किया। प्रेमा ने मधुमालती का पता बता कर कहा कि मेरी वह सखी है। मैं उसे तुझसे मिला दूँगी। मनोहर को लिए हुए प्रेमा अपने पिता के नगर में आई। मनोहर के उपकार को सुनकर प्रेमा का पिता उसका विवाह मनोहर के साथ करना चाहता है। पर प्रेमा यह कहकर अस्वीकार करती है कि मनोहर मेरा भाई है और मैंने उसे उसकी प्रेमपात्री मधुमालती से मिलाने का वचन दिया है
124. नंददास की ‘जड़िया’ उपाधि को सार्थक बनाने वाली रचना है
(A) रूपमंजरी
(B) विरहमंजरी
(C) सिद्धांत पंचाध्यायी
(D) रास पंचाध्यायी
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उत्तर – इनके काव्य के विषय में यह उक्ति प्रसिद्ध है-
‘और कवि गढ़िया, नंददास जड़िया’
इससे प्रकट होता है कि इनके काव्य का कला-पक्ष महत्त्वपूर्ण है। इनकी रचना बड़ी सरस और मधुर है। इनकी सबसे प्रसिद्ध पुस्तक ‘रासपंचाध्यायी’ है जो रोला छंदों में लिखी गई है। इसमें जैसा कि नाम से ही प्रकट है, कृष्ण की रासलीला का अनुप्रासादियुक्त साहित्यिक भाषा में विस्तार के साथ वर्णन है।
कृतियाँ पद्य रचना
- रासपंचाध्यायी
- भागवत दशमस्कंध
- रुक्मिणी मंगल
- सिद्धांत पंचाध्यायी
- रूपमंजरी
- मानमंजरी
- विरहमंजरी
- नामचिंतामणिमाला
- अनेकार्थनाममाला
- दानलीला
- मानलीला
- अनेकार्थमंजरी
- ज्ञानमंजरी
- श्यामसगाई
- भ्रमरगीत
- सुदामाचरित्र
- गद्यरचना
- हितोपदेश
- नासिकेतपुराण
125. भक्ति के साधारण सिद्धांतों का कथन स्वामी हरिदास ने अपनी किस कृति में किया ?
(A) निजमत सिद्धांत
(B) सिद्धांत के पद
(C) केलिमाल
(D) हितवाणी
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उत्तर – (C) केलिमाल
स्वामी हरिदास ने अपने सिद्धांतों को स्वतंत्र रूप से नहीं लिखा। श्याम-श्यामा की निकुंज-लीलावर्णन के लिए जो पद वे बनाते थे, उन्हीं में सिद्धांतों का भी समावेश है। उनकी रचनाओं का संकलन ‘केलिमाल’ नामक पुस्तक में कर दिया गया है।
- 11 – भाद्रपद मासकी ‘अजा’ और ‘पद्मा’ एकादशीका माहात्य
- 14 – पुरुषोत्तम मासकी ‘कमला’ और ‘कामदा’
- 13 – कार्तिक मासकी ‘रमा’ और ‘प्रबोधिनी’एकादशीका माहात्म्य
- 12 – आश्विन मासकी ‘इन्दिरा’ और ‘पापाङ्कुशा’ एकादशीका माहात्य
- 10 – श्रावण मासकी ‘कामिका’ और ‘पुत्रदा’ एकादशीका माहात्म्य