Unit-06 -Online Exam Test
Loading…
Learn Simple, Learn Better.
Loading…
यू.जी.सी. NTA नेट / जेआरएफ परीक्षा, जून- 2020 शिक्षण एवं शोध अभियोग्यता प्रथम प्रश्न-पत्र : Shift-II (व्याख्या सहित हल प्रश्न-पत्र ) (परीक्षा तिथि 29 सितम्बर, 2020 ) Question-26. All flowers are toys. Some toys are trees. Some butterflies are trees, then सभी पुष्प खिलौने हैं। कुछ खिलौने वृक्ष हैं। कुछ तितलियां वृक्ष हैं तो : … Read more
यू.जी.सी. NTA नेट / जेआरएफ परीक्षा, जून 2020 शिक्षण एवं शोध अभियोग्यता प्रथम प्रश्न-पत्र : Shift-I ( व्याख्या सहित हल प्रश्न-पत्र ) (परीक्षा तिथि 25 सितम्बर, 2020 ) Question-26. The sequential order of syllogism in Nyaya philosophy is न्याय दर्शनशास्त्र में न्याय वाक्य की क्रमबद्धता है- A. Nigman/निगमन B. Udaharana / उदाहरण C. Hetu/हेतु D. … Read more
यू. जी. सी. NTA नेट / जेआरएफ परीक्षा, जून- 2020 शिक्षण एवं शोध अभियोग्यता प्रथम प्रश्न-पत्र : Shift-II ( व्याख्या सहित हल प्रश्न-पत्र ) (परीक्षा तिथि 24 सितम्बर, 2020 ) Question-26.Given below are two statements, one is labelled as Assertion (A) and the other is labelled as Reason (R) नीचे दो कथन दिए गए हैं: … Read more
यू.जी.सी. NTA नेट / जेआरएफ परीक्षा, जून- 2020 शिक्षण एवं शोध अभियोग्यता प्रथम प्रश्न-पत्र : (व्याख्या सहित हल प्रश्न-पत्र ) (परीक्षा तिथि 24 सितम्बर, 2020 Shift – I ) : Question-26. Given below are propositions: philosophers are fallible Socrates is not fallible In the classical section of opposition, which one of the following is … Read more
तत्त्वचिन्तन की प्रक्रिया में प्रमाणमीमांसा का अत्यन्त महत्त्वपूर्ण स्थान है क्योंकि प्रमाणों की सहायता से ही प्रमेयो (तत्त्वों) का ज्ञान सम्भव होता है। दर्शनसरणियो में यह प्रसिद्ध उक्ति भी है – मानाधीना मेयसिद्धि अर्थात् मेय (प्रमेय) की सिद्धि मान (प्रमाण) के अधीन होती है। प्रमा या यथार्थज्ञान की उपलब्धि किसी साधन की सहायता से ही … Read more
प्रत्यक्ष ज्ञान प्रत्यक्ष ज्ञान के भेदों का निरूपण करते हुए आचार्य कहते है कि प्रत्यक्ष दो प्रकार का होता है (1) निर्विकल्पक प्रत्यक्ष, (2) सविकल्पक प्रत्यक्ष । निर्विकल्पक प्रत्यक्ष का स्वरूप है निष्प्रकारकं ज्ञानं निर्विकल्पकम्’ अर्थात् निष्प्रकारक ज्ञान को निर्विकल्पक प्रत्यक्ष कहते है। न्याय-वैशेषिक मत में प्रकार का अर्थ विशेषण होता है, अतः प्रकारता का … Read more
कारण कारणं त्रिविधम्-रामवाय्यमवायिनिमित्तभेदात् । यत्समवेत कार्यमुत्पद्यते तत्समवायिकारणम्। यथा तन्तव पटस्य, पटश्च स्वगतरूपादे। कार्येण कारणेन वा सहैकस्मिन्नर्थे समवेत सत् कारणम् असमवायिकारणम्। यथा तन्तु संयोग पटस्य, तन्तुरूपं पटगतरूपस्य च। तदुभयभिन्न कारणं निगितकारणम्, यथा-तुरीवेमादिक पटस्य । तदेत्त्रिविधकारणमध्ये यदसाधारण कारणम् तदेव करणम्। व्याख्या: आचार्य अन्नम्मभट्ट कारण का लक्षण करते है कारणम्’। जो कार्य का नियत पूर्ववर्ती हो उसे कारण … Read more
अनुभव प्रमाण अनुभव दो प्रकार का होता है – (1) यथार्थ अनुभव, (2) अयथार्थ अनुभव यथार्थ अनुभव का लक्षण करते हुए आचार्य कहते हैं ‘तद्वति तत्प्रकारको ऽनुभव यथार्थः जिसमें जो है, वहाँ उसी प्रकार का जो अनुभव होता है, उसे यथार्थानुभव कहते है। आशय यह है कि कोई भी पदार्थ जिस स्वरूप या स्वभाव का … Read more
(Source : IGNOU) तर्कसंग्रह (अन्नम्भट्ट) आचार्य अन्नम्भट्टकृत् तर्कसंग्रह’ यद्यपि वैशेषिक दर्शन का प्रकरण ग्रन्थ है तथापि इसमें न्यायदर्शनसम्मत चतुर्विध प्रमाणव्यवस्था का विवेचन किया गया है। इन्द्रिय तथा अर्थ (विषय) के सन्निकर्ष से उत्पन्न ज्ञान को प्रत्यक्ष प्रमाण कहते है। अनुमान प्रमाण लिगपरामर्श से जन्य होता है। सज्ञासझिसम्बन्ध का ज्ञान कराने वाला प्रमाण उपमान कहलाता है। … Read more