106. ‘काव्य में रहस्यवाद’ निबंध के लेखक कौन हैं?
(1) महावीर प्रसाद द्विवेदी
(2) आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी
(3) नलिन विलोचन शर्मा
(4) आचार्य रामचंद्र शुक्ल
UGCNET-EXAM-SECOND-PAPER-HINDI- परीक्षा तिथि -18/06/2024
उत्तर – (1) महावीर प्रसाद द्विवेदी
काव्य में रहस्यवाद आचार्य रामचंद्र शुक्ल द्वारा लिखित एक गंभीर आलोचनात्मक पुस्तक है।
107. ‘इतिहास तिमिरनाशक’ पुस्तक के लेखक कौन हैं?
(1) बालकृष्ण भट्ट
(2) बदरी नारायण चौधरी ‘प्रेमधन’
(3) राजा शिव प्रसाद
(4) मिश्र बंधु
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उत्तर – (3) राजा शिव प्रसाद
इतिहास तिमिरनाशक(1876)
108. सूची-1 के साथ सूची-II का मिलान कीजिए:
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :
(1) А-II, B-III, C-IV, D-I
(2) A-VB-1, C-II, D-III
(3) A-III, B-1, C-IV, D-II
(4) A-II-B-1, C-IV, D-III
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उत्तर – (4) A-II-B-1, C-IV, D-III
- आपका बंटी – आपका बंटी उपन्यास के पात्र-शकुन,अजय,डॉ. जोशी,वकील चाचा,मीरा आदि हैं।
- परीक्षागुरु – ब्रजकिशोर
- रामचंद्र शुक्ल ने लाला श्रीनिवास दास के ‘परीक्षा गुरु’ (1882) उपन्यास को. “पहला अंग्रेजी ढंग का नावेल” कहा था।
- ‘परीक्षा गुरू’ में मदनमोहन, ब्रजकिशोर, चुन्नी लाल, शिंभूदयाल, हरकिशोर मध्यवर्ग से सम्बन्धित हैं। परीक्षा गुरू के पात्रों के माध्यम से उपन्यासकार ने नये युग का सन्देश दिया है। इस उपन्यास के पात्र न तो राजा-महाराजा हैं, न गरीब किसान हैं। अधिकांश पात्र दिल्ली शहर के मध्यवर्ग के परिवारों से सम्बन्धित हैं। ब्रजकिशोर आदर्श पात्र है, जिसे लेखक ने वकील के रूप में वर्णित किया है। इस युग में राष्ट्रीय आन्दोलन तथा सामाजिक आन्दोलन का सूत्रधार यह मध्यवर्गीय शिक्षित वकील समुदाय माना जाता था जिसका ब्रजकिशोर प्रतिनिधित्व करता है। https://www.ijsrst.com/paper/7178.pdf
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धरती घन न अपना
…. …
ताई निहाली दूध लेकर चाय बनाने के लिए आगन म आ गई। काली दरवाजे म स्त्र गया और चारा ओर अच्छी तरह दखने के वा जीतू व पास आ गया । उमन जेव स एवं बहुत ष्ठात्री सी गठटी निकाली और उसम स छोटी मी शीशी निकालकर जानू को दिखाता हुआ बोला
जमी तर नार व अतर यह दवाई लगाना है। पहले तो यत्र ल्द करेगी, फिर एक्टम आराम आ जाएगा ।
बागे न वपड का एक टुक्डा शीशी म भिगारर कुछ बूंदें जीनू व नार म टरश दा। जीनू द स वराहन लगा और हाथ मुह पर रख लिया।
मगर कर अभा आराम था जाएगा। वाली न उमरा हाय मुह व उपर म उठा किया। चार यूदें नार में बहार जानू में उपरी हाड पर पल गइ
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धरती घन न अपना
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109. ‘आगरा बाजार’ का समापन किस नज्म से होता है?
(1), रोटीनामा
(2) बंजारानामा
(3) आदमीनामा
(4) शहर आशोब
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उत्तर – (3) आदमीनामा
कोरस : हो नाच रँगीली परियों का, बैठे हों गुलरू (फूलों जैसे चेहरे वाले) रंग-भरे कुछ भीगी तानें होली की, कुछ नाजो-अदा के ढंग भरे दिल भूले देख बहारों को, और कानों में आहंग (संगीत की मधुरता) भरे कुछ तबले खड़कें रंग भरे, कुछ ऐश के दम मुँहचंग भरे कुछ घुघँरू ताल छनकते हों, तब देख बहारें होली की गुलजार खिले हों परियों के, और मजलिस की तैयारी हो कपड़ों पर रंग के छींटों से खुशरंग अजब गुलकारी हो मुँह लाल, गुलाबी आँखें हों, और हाथों में पिचकारी हो उस रंग-भरी पिचकारी को अँगिया पर तककर मारी हो सीनों से रंग ढलकते हों, तब देख बहारें होली की फकीर ‘आदमीनामा’ गाते हुए अंदर आते हैं। इस नज्म में स्टेज पर के सब लोग शामिल हो जाते हैं। हर बंद एक नया आदमी उठाता है और टीप की तर्ह (कविता की वह आधारभूत पंक्ति जिसके अंतिम शब्द से बाकी पंक्तियों को तुकांत बनाया जाता है) पर सब एक साथ तीन बार दोहराते हैं: ‘जरदार बे-नवा (पैसे वाला और कंगाल) है सो है वह भी आदमी!’
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110. आचार्य रामचंद्र शुक्त की पुस्तक ‘त्रिवेणी’ में निम्न कवियों पर निबंध संकलित हैं:
(1) कबीर, जायधी, मुर
(2) तुलसी, कबीर, जायसी
(3). सूर, तुलसी, जायसी
(4) केशवदास, कबीर, सूर
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उत्तर – (3). सूर, तुलसी, जायसी
‘त्रिवेणी’ आचार्य रामचन्द्र शुक्ल की तीन कृतियों मलिक मुहम्मद जायसी, महाकवि सूरदास तथा गोस्वामी तुलसीदास के आलोचनात्मक अंशों का संकलन है। निबन्धों को इस दृष्टि से संकलित किया गया है कि साहित्य परम्परा की श्रेष्ठता तथा निबन्ध रचना का मानकीकरण हो सके।
- 11 – भाद्रपद मासकी ‘अजा’ और ‘पद्मा’ एकादशीका माहात्य
- 14 – पुरुषोत्तम मासकी ‘कमला’ और ‘कामदा’
- 13 – कार्तिक मासकी ‘रमा’ और ‘प्रबोधिनी’एकादशीका माहात्म्य
- 12 – आश्विन मासकी ‘इन्दिरा’ और ‘पापाङ्कुशा’ एकादशीका माहात्य
- 10 – श्रावण मासकी ‘कामिका’ और ‘पुत्रदा’ एकादशीका माहात्म्य