भारतीय तर्कशास्त्र-PART-06-अनुपलब्धि-शब्द 

अनुपलब्धि प्रमाण (Non-Apprehension) :  अनुपलब्धि प्रमाण का अर्थ एवं स्वरूप अनुपलब्धि का शाब्दिक अर्थ है जो उपलब्ध न हो अर्थात् जिसकी उपलब्धि (ज्ञान) का अभाव हो उसे ही अनुपलब्धि कहते हैं। प्रमाण के रूप में अनुपलब्धि का प्रमुख कार्य अभाव को ग्रहण करना है। प्रमुख मीमांसक आचार्य ‘पार्थसारथी मिश्र ने ‘शास्त्रदीपिका’ में उल्लिखित किया है … Read more

भारतीय तर्कशास्त्र-PART-05-उपमान -अर्थापत्ति

02. उपमान प्रमाण  (COMPARISION) :  उपमान प्रमाण (उपमितिकरणम् से उत्पद्यते पर्यन्त) उपमितिकरणमुपमानम्। संज्ञासंज्ञिसम्बन्धज्ञानमुपमितिः ।  तत्करणं सादृश्यज्ञानम् । अतिदेशवाक्यार्थस्मरणमवान्तरव्यापारः ।  तथा हि- कश्चिद् गवयशब्दार्थमजानन् कुतश्चिदारण्यकपुरुषात् ‘गोसदृशो गवयः’ इति श्रुत्वा, वनं गतो वाक्यार्थं स्मरन् गोसदृशं पिण्डं पश्यति।  तदनन्तरम् ‘असौ गवयशब्दवाच्यः’ इत्युपमितिरुत्पद्यते । व्याख्या : तर्कसंग्रहकार आचार्य अन्नम्भट्ट प्रत्यक्ष एवं अनुमान प्रमाण का निरूपण करने के उपरान्त तृतीय प्रमाण ‘उपमान’ … Read more

भारतीय तर्कशास्त्र-PART-04-हेत्वाभास

हेत्वाभास : हेत्वाभास के 5 प्रकार सव्यभिचारविरुद्धसत्प्रतिपक्षासिद्धबाधिताः पञ्च हेत्वाभासाः । व्याख्या : अनुमान प्रमाण का स्वरूप निरुपित करने के उपरान्त आचार्य अन्नम्भट्ट अनुमान के ही अंगभूत ‘हेत्वाभास’ का विवेचन प्रारम्भ करते हैं। न्याय-वैशेषिक दर्शन में हेत्वाभास यद्यपि असद् हेतु हैं तथापि ये हेतु या सद्हेतु के ही अंग हैं, अतः हेतुज्ञान की पूर्णता तथा अनुचित … Read more

भारतीय तर्कशास्त्र-PART-03-अनुमान की व्याप्ति

अनुमान की व्याप्ति :  अनुमान प्रमाण (अनुमितिकरणम् से इति बाधित्वम् पर्यन्त) अनुमितिकरणमनुमानम्। परामर्शजन्यं ज्ञानमनुमितिः । व्याप्तिविशिष्टपक्षधर्मताज्ञानं परामर्शः। यथा ‘वह्निव्याप्यधूमवानयं पर्वत इति ज्ञानं परामर्शः। तज्जन्यं पर्वतो वह्निमानिति ज्ञानमनुमितिः। यत्र यत्र धूमस्तत्र तत्राग्निरिति साहचर्यनियमो व्याप्तिः । व्याप्यस्य पर्वतादिवृत्तित्वं पक्षधर्मता। प्रसंग : प्रस्तुत अनुच्छेद में तर्कसंग्रहकार आचार्य अन्नम्भट्ट न्याय-वैशेषिक परम्परा में स्वीकृत अनुमान प्रमाण के स्वरूप का विवेचन … Read more

भारतीय तर्कशास्त्र-INDIAN LOGIC-PART-02

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02. अनुमान (Anumana ,Inference ) :  अनुमान शब्द का अर्थ संस्कृत शब्द अनुमान दो शब्दों, अनु अर्थात उत्तरवर्ती और मान अर्थात मापन से मिलकर बना है। इस प्रकार सम्पूर्ण शब्द से तात्पर्य है किसी घटना का उत्तरवर्ती आकलन। यह वह ज्ञान है जो प्रमाण के पश्चात् आता है। स्पष्ट है कि इस प्रकार का ज्ञान … Read more

भारतीय तर्कशास्त्र-INDIAN LOGIC PART-01

भारतीय तर्कशास्त्र: ज्ञान के साधन।(Indian Logic: Means of knowledge.) प्रस्तावना भारतीय दार्शनिक चिन्तन परम्परा स्वाभिमत सैद्धान्तिक चिन्तन को जिज्ञासुओं के समक्ष  प्रस्तुत करने के लिए तीन पद्धतियों का प्रयोग करती है तत्त्वमीमांसा, ज्ञानमीमांसा तथा आचारमीमांसा। तत्त्वचिन्तन की इस प्रक्रिया में प्रमाणमीमांसा का अत्यन्त महत्त्वपूर्ण स्थान है क्योंकि प्रमाणों की सहायता से ही प्रमेयों (तत्त्वों) का … Read more