1.2.2 व्यक्तिगत भिन्नता (Vyaktigat Bhinnata)

व्यक्तिगत भिन्नता (Individual Difference) 

सभी के संपूर्ण व्यक्तित्व के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण।

परिचय – introduction

 व्यक्तिगत भिन्नता (Individual Difference) से अभिप्राय है, प्रत्येक व्यक्ति में जैविक, मानसिक, सांस्कृतिक, संवेगात्मक अंतर पाया जाना। इसी अंतर के कारण एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से भिन्न माना जाता है। मनोविज्ञान के क्षेत्र में 19वीं सदी में फ्रांसिस गॉल्टन, पीयरसन, कैटल, टर्मन आदि ने  व्यक्तिगत भिन्नता (Individual Difference) का पता लगाया तथा उनके कारणों की खोज की। स्किनर के शब्दों में बालक की प्रत्येक संभावना के विकास का एक विशिष्ट काल होता है। यह काल व्यक्तिक विभिन्नता के कारण भिन्न-भिन्न अवधि का होता है। यदि उचित समय पर इस संभावना को विकसित करने का प्रयत्न नहीं किया गया तो उसके नष्ट हो जाने का भय रहता है।

मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण(psychological approach) से स्पिनर ने लिखा है:- “व्यक्तिगत विभिन्नता में संपूर्ण व्यक्तित्व का कोई भी ऐसा पहलू सम्मिलित हो सकता है जिसकी माप की जा सकती है।

माप की जाने वाले पहलू कौन से हैं? इस पर टाइलर ने लिखा है। “शरीर के आकार और स्वरूप, शारीरिक कार्यों कि गति संबंधी क्षमताओं, बुद्धि उपलब्धि, ज्ञान, रुचियांँ, अभिवृत्ति और व्यक्तित्व के लक्षणों में माप की जा सकने वाली विभिन्नताओं की उपस्थिति सिद्ध की जा चुकी है।”

Measurable differences have been shown to exist in physical size and shape physiological functions, motor capacities, intelligence, achievement and knowledge, interests, attitude and personality traits. Tyler(p. 37)

 व्यक्तिगत भिन्नता (Individual Difference) का अर्थ- 

जब दो बालक विभिन्न समानताएँ रखते हुए भी आपस में भिन्न व्यवहार करते हैं तो इसे ‘‘वैयक्तिक भिन्नता’ कहा जाता है।  व्यक्तिगत भिन्नता (Individual Difference) से अभिप्राय है कि प्रत्येक व्यक्ति में जैविक, मानसिक, सांस्कृतिक, संवेगात्मक अन्तर पाया जाना। इसी अन्तर के कारण एक व्यक्ति, दूसरे से भिन्न माना जाता है। अतः कोई भी दो व्यक्ति समान नहीं होते। यहाँ तक कि जुड़वाँ बच्चों में भी असमानता पाई जाती है। इस दृष्टि से  व्यक्तिगत भिन्नता (Individual Difference) प्रकृति द्वारा प्रदत्त स्वाभाविक गुण हैं। विभिन्न मनोवैज्ञानिकों ने  व्यक्तिगत भिन्नता (Individual Difference) को निम्नलिखित प्रकार से परिभाषित किया है-

  1. स्किनर के अनुसार- ‘‘व्यक्तिगत विभिन्नता में सम्पूर्ण व्यक्तित्व का कोई भी ऐसा पहलू सम्मिलित हो सकता है, जिसका मापन किया जा सकता है।’’
  2. टायलर के अनुसार- ‘‘शरीर के आकार और स्वरूप, शारीरिक गति सम्बन्धी क्षमताओं, बुद्धि, उपलब्धि, ज्ञान, रूचियों, अभिवृत्तियों और व्यक्तित्व के लक्षणों में माप की जा सकने वाली विभिन्नताओं की उपस्थिति सिद्ध की जा चुकी है।’’

व्यक्तिगत भिन्नता  की प्रकृति एवं विशेषताएँ

Nature and characteristics of individual difference

मनोवैज्ञानिकों ने व्यक्तिक भिन्नता का अत्यंत सूक्ष्मता से अध्ययन करते हुए इस विषय में निम्नलिखित तथ्य उजागर किए हैं:-

  • संसार में कोई भी दो व्यक्ति एक समान नहीं होते। उनमें किसी न किसी प्रकार की भिन्नता अवश्य होती है।
  •  व्यक्तिगत भिन्नता (Individual Difference) में व्यक्तित्व के केवल मापीय लक्षणों या मेजरेबल ट्रेट्स को ही समाहित किया जाता है। जैसे भार, लंबाई, बुद्धि, अभिक्षमता, क्रोध एवं सामाजिकता आदि।
  •  व्यक्तिगत भिन्नता (Individual Difference) मानव के विविध प्रकार के विकास के आधार पर होती है।
  • व्यक्ति-व्यक्ति में किसी गुण में भिन्नता उनके प्राप्तांक उनके गुण विशेष के मध्यमान से विचलन के अंतर द्वारा प्राप्त होती है।

व्यक्तिगत भिन्नता के प्रकार-types of individual differences–

  1. शारीरिक विभिन्नता की दृष्टि से व्यक्ति भिन्न-भिन्न प्रकार के होते हैं जैसे उनका रूप, रंग, वजन, यौन भेद आदि।
  2. मानसिक विभिन्नता या मेंटल डिफरेंस, मानसिक दृष्टि से व्यक्तियों में अनेक विभिन्नताओं के दर्शन होते हैं। कोई अत्यंत प्रतिभाशाली, कोई अत्यंत बुद्धिमान, कोई कम बुद्धिमान और कोई व्यक्ति मूर्ख होता है। इसके साथ ही व्यक्ति जो है, शैशवावस्था किशोरावस्था आदि में भी विभिन्न मानसिक योग्यता का प्रदर्शन करता है।
  3. संवेगात्मक विभिन्नता अथवा इमोशनल डिफरेंस। संवेग की दृष्टि से व्यक्तिगत विभिन्नता को सहज ही जाना जा सकता है। इन विभिन्नताओं के कारण कुछ लोग उदार होते हैं।  कुछ कठोर, कुछ खिन्नचित्त और कुछ प्रसन्नचित्त। इनकी माप संवेगात्मक परीक्षणों के द्वारा की जा सकती है।
  4. रुचियों मे विभिन्नता (इंटरेस्ट्स डिफरेंस )-रुचियों की दृष्टि से व्यक्तियों में आश्चर्यजनक भिन्नता देखने को मिलती हैं। किसी को भोजन अत्यधिक प्रिय होता है । किसी को संगीत, किसी को चित्रकला, किसी को गणित, किसी को खेल और किसी को चर्चा में ही अधिक आनंद आता है।
  5. विचारों में भिन्नता -विचारों में भिन्नता यह अत्यंत सरलता से देखे जाने वाला लक्षण है। कोई व्यक्ति अत्यधिक धार्मिक, कोई अधार्मिक, कोई नास्तिक,  कोई उदार, कोई अनुदार,  कोई नैतिक, कोई अनैतिक, इस प्रकार विचारों में भिन्नता सहज देखी जा सकती है। समान विचारधारा के लोगों की प्राप्ति प्रायः कठिन होती है।
  6. सीखने में भिन्नता इस दृष्टिकोण से हम देखते हैं कि कोई विद्यार्थी किसी विषय को शीघ्रता से सीख जाता है।  जबकि कोई विद्यार्थी उसी विषय के उसी बिंदु को समझने में बहुत देर लगा देता है। और कोई विद्यार्थी उसे समझ ही नहीं पाता, जबकि वह कक्षा में पढ़ते हैं और एक ही आयु वर्ग के होते हैं।
  7. गत्यात्मक योग्यता में विभिन्नता- जैसा कि क्रो एंड क्रो ने लिखा है, “शारीरिक क्रिया में सफल होने की योग्यता में एक समूह के व्यक्तियों में भी महान विभिन्नता होती है। जैसे किसी खेल को खेलते समय एक ही आयु वर्ग के और समान भार के व्यक्ति भिन्न-भिन्न गतिशीलता का प्रदर्शन करते हैं।
  8. चरित्र में भिन्नता -दृष्टिकोण से भी सभी लोग भिन्नता का प्रदर्शन करते हैं। साहित्य, शिक्षा, संगति, संगीत, परिवार, पड़ोस आदि का चरित्र पर निश्चित रूप से प्रभाव पड़ता है।
  9. विशिष्ट योग्यता में भिन्नता- डिफरेंस इन स्पेशल एबिलिटी- विशिष्ट योग्यताओं की दृष्टि से व्यक्तियों में अनेक भिन्नता होती है। एक साधारण सी बात यह है कि सभी व्यक्तियों में विशिष्ट योग्यताएं नहीं होती हैं। और जिनमें होती भी हैं, तो उनकी मात्रा में अवश्य अंतर होता है। एक ही टीम के सभी खिलाड़ी या एक ही फिल्म के सभी कलाकार, कला के एक ही स्तर की कला का प्रदर्शन नहीं करते।
  10. व्यक्तित्व में भिन्नता – व्यक्तित्व की दृष्टि से व्यक्तियों की विशेषताएं किसी न किसी रूप में अवश्य प्रदर्शित होती है। सामान्यतः अंतर्मुखी एवं बहिर्मुखी, सामान्य और असाधारण व्यक्तित्व के लोगों से हम कभी न कभी अवश्य मिले होंगे। हम उनकी योग्यता से भले ही प्रभावित न हों, पर उनके व्यक्तित्व से अवश्य होते हैं। इस विषय में टायलर का कथन है- “संभवतः व्यक्ति, योग्यता की विभिन्नताओं के बजाय व्यक्तित्व की विभिन्नताओं से अधिक प्रभावित होता है।”

अंतर-बाह्य विभिन्नताओं के आधार पर सामान्यतः व्यक्तिगत भिन्नताएंँ दो प्रकार की मानी जाती हैं-

1. आंतरिक विभिन्नताएं – हर एक व्यक्ति अपने आप में भिन्नता लिए होता है। उसकी सम्पूर्ण शारीरिक और मानसिक स्थिति एक जैसे स्तर की नहीं होती ।

कोई व्यक्ति स्मृति की दृष्टि से ठीक हो सकता है किंतु तर्क शक्ति में उतना अच्छा नहीं होता। वह चिंतनशील होने के साथ साथ सामाजिक भी हो सकता है।

2. बाह्य विभिन्नताएं – दो या दो से अधिक व्यक्तियों के मध्य शारीरिक तथा मानसिक शक्तियों और संरचना के संदर्भ में घटित विभिन्नताओं को बाह्य विभिन्नताओं के नाम से जाना जाता है।

व्यक्तिगत विभिन्नताओं के कारण –

1. वंशानुक्रम-inheritance: – व्यक्तिगत भिन्नताओं का प्रमुख कारण वंशानुक्रम है। वंशानुक्रम के कारण के प्रमुख विचारक- रूसो, पीयरसन, टरमन, गालतन आदि हैं। इन्होंने अपने प्रयोगों द्वारा सिद्ध कर दिया है कि, व्यक्त की शारीरिक और मानसिक विभिन्नता का विशिष्ट कारण वंशानुक्रम है।

एक संतति से दूसरी संतति में पैतृक गुणों के संक्रमण के फलस्वरूप ही प्राणी – प्राणी में भिन्नता दृष्टिगोचर होती है।

यही कारण है कि स्वस्थ् और बुद्धिमान माता-पिता की संतान भी अधिक स्वस्थ और बुद्धिमान होती है।

2. शारीरिक विकास-physical development:- विभिन्न व्यक्तियों में लम्बाई, भार, शारीरिक संरचना, तथा विभिन्न शारीरिक अंगों की विकास की गति और मात्रा में व्यक्तिगत विभिन्नता के कारण अंतर देखा जा सकता है।

3. आयु (age)-  आयु, प्रत्येक बालक की बुद्धि, योग्यता, शारीरिक सामर्थ्य तथा परिपक्वता आदि में अंतर उत्पन्न कर देती है।

4. स्वभाव-nature:- चिकित्साशास्त्रियों ने स्वभाव के कारण मनुष्य-मनुष्य में अंतर माना है। जैसे कोई व्यक्ति स्वभाव से तेज होता है और कोई सुस्त। कोई क्रियाशील होता है तो कोई निष्क्रिय।

5. संवेगात्मक स्थिरता-emotional stability:-  अनेक शारीरिक, मानसिक और परिवेश जनित कारकों के कारण भिन्न भिन्न- व्यक्तियों की संवेगात्मक स्थिरता में अंतर होता है और इससे व्यक्तियों के स्वभाव में अंतर बढ़ जाता है।

6.सीखने से संबंधित अंतर-learning differences:-  भिन्न भिन्न व्यक्तियों में अधिगम (सीखने)  की योग्यता, उसके प्रति अभिवृति, तत्परता, गति और संक्रमण के कारण अंतर लाता जाता है।

7.शिक्षा और आर्थिक दशा-Education and Financial status :-

शिक्षा व्यक्ति को शिष्ट, गम्भीर, विचार-शील बनाकर अशिक्षित व्यक्ति से उसे भिन्न कर देती है। निम्न आर्थिक दशा अर्थात् गरीबी को सभी तरह के पापों और दुर्गुणों का कारण माना जाता है। गरीबी के कारण ही लोग चोरी, हत्या जैसे, जघन्य अपराध को भी गलत नहीं मानते। परन्तु ये लोग उन व्यक्तियों से पूर्णतया भिन्न हैं, जो उत्तम आर्थिक दशा के कारण प्रत्येक कुकर्म को अक्षम्य अपराध समझते है।

8. प्रशिक्षण – Training

प्रशिक्षण भी  व्यक्तिगत भिन्नता (Individual Difference) का एक प्रमुख कारण है। एक ही आयु तथा समान बुद्धि के बालकों में भी अन्तर देखने को मिलता है। यह अन्तर उनको मिलने वाले प्रशिक्षण का परिणाम है। कम बुद्धि वाला बालक भी प्रशिक्षण के माध्यम से तीव्र बुद्धि वाले बालक की अपेक्षा अधिक श्रेष्ठ हो सकता है। शारीरिक प्रशिक्षण के द्वारा व्यक्ति की शारीरिक एवं मानसिक क्षमताओं को विकसित किया जा सकता है।

9. लिंग भेद(Gender Difference):-  यद्यपि आधुनिक मनोवैज्ञानिक केवल लिंग भेद को लड़के – लड़कियों में अंतर का कारण नही मानते तो भी निसंदेह लिंग भेद से व्यक्तियों में अंतर देखा जा सकता है।

10.रचनात्मक शक्ति या क्रिएटिव पावर – एडलर ने रचनात्मक शक्ति को व्यक्तिगत भिन्नता का प्रमुख कारण माना है। उन्होंने यह बात स्वीकार की कि  व्यक्तिगत भिन्नता (Individual Difference) के मूल कारण वंशानुक्रम एवं पर्यावरण ही है परंतु साथ ही यह भी कहा कि व्यक्ति के व्यक्तित्व निर्माण में उसकी रचनात्मक शक्ति का भी बड़ा हाथ रहता है।

10. वातावरण(Environment) :- व्यक्तिगत अंतर में वातावरण का प्रभाव, आनुवांशिकता से किसी प्रकार भी कम नहीं है। बालक के 

वातावरण में क्रमशः परिवर्तन से उसके व्यक्तित्व में परिवर्तन देखा जा सकता है।

11.जाति, प्रजाति व देश

एक देश में रहने वाली विभिन्न जातियों और प्रजातियों में अन्तर होता है।  इसी प्रकार से भारतीयों के विभिन्न वर्गों में अन्तर स्पष्ट होता है। इन अन्तरों पर वंशानुक्रम एवं पर्यावरण के प्रभाव प्रमुख होते है। वैयक्तिक भिन्नताओं के कारण ही हमें विभिन्न देशों के व्यक्तियों को पहचानने में किसी प्रकार की कठिनाइयों नहीं होती है।

12. विशिष्ट योग्यताएं एवं अयोग्यताएं– बालकों में औसत,मध्यम एवं श्रेष्ठ इन आधार पर उनकी योग्यता का वर्गीकरण किया जा सकता है।

यहाँ एक बात ध्यान देने योग्य है कि बालक भले किसी विषय में मध्यम या औसत वर्ग का हो परन्तु यह हो सकता है किसी अन्य विषय में वह विशिष्ट योग्यता रखता हो।

उदाहरण स्वरूप कोई बालक गणित में कमजोर हो सकता है परन्तु अंग्रेजी में अच्छा हो सकता है।

13.अन्य कारण:- उपर्युक्त कारणों के अलावा अनेक कारण व्यक्तियों में अंतर उत्पन्न करते है। जैसे रुचियां, अभिवृतियां, व्यक्तित्व के विभिन्न स्थायी भाव तथा सामूहिक परिस्तिथियां इत्यादि।

व्यक्तिगत भेदों का  शिक्षा में अत्यधिक महत्व -importance of individual differences in education

बालको के व्यक्तिगत भेदों का शिक्षा में अत्याधिक महत्व है। शिक्षा का लक्ष्य बालकों का सर्वांगीण विकास करना है। व्यक्तिगत भेद होने से बालक का विकास एक सी विधियों से न करके अलग अलग विधियां प्रयोग में लायी जाती है। अतः शिक्षकों को बालकों के व्यक्तिगत अंतर को ध्यान में रखते हुए शिक्षा का प्रबंध करना चाहिए।

मूल्यांकन-Evaluation:

अधिगम के लिए आकलन और अधिगम का आकलन में अंतर, शाला आधारित आकलन, सतत एवं समग्र मूल्यांकन-

  • अधिगम की प्रक्रिया में कोई एक लक्ष्य तथा  उस लक्ष्य तक पहुंचने में बाधा दोनो ही उपस्थित रहते है। सीखना सदैव अर्थपूर्ण होता है।

• बालक के सामने जब कोई अर्थपूर्ण लक्ष्य  होता है तो, उसकी प्राप्ति के लिए अभिप्रेरणा आवश्यक होती है। लक्ष्य प्राप्ति के मार्ग में उपस्थित अवरोधक को दूर करने के लिए वह अनेक प्रकार की अनुक्रियाएं करते हैं। किंतु उसमे जो क्रिया उपयुक्त होती है, उसके द्वारा वह बाधाओं को पार करके लक्ष्य तक पहुंचता है। इस उपर्युक्त क्रिया को वह चयन कर लेता है और बार बार इसको प्रयास करके वह प्राप्त कर लेता है।

• मूल्यांकन से छात्र के ज्ञान की सीमा का निर्धारण के साथ साथ उनकी रुचियों,   कार्य क्षमताओं, व्यक्तित्व व्यवहारों, आदतों तथा बुद्धि आदि की प्रगति को आंक कर गुणात्मक निर्णय करता है।

• शिक्षा मनोविज्ञान व्यवहारगत परिवर्तनों, शैक्षिक उपलब्धियों, छात्र वर्गीकरण, भावी संभावनाओं तथा भविष्यवाणी करने के लिए अनेकानेक मापन एवं मूल्यांकन प्रविधियों एवं सांख्यिकी विधियों का प्रयोग तथा अध्धयन करता है।

• शिक्षा मनोविज्ञान इसके अलावा बुद्धि,निष्पति, अभिरुचि आदि की माप भी करता है। 

व्यक्तिगत विभिन्नता का महत्व (Importance of Individual Differences)

  • आधुनिक मनोवैज्ञानिक, बालकों की वैयक्तिक विभिन्नताओं को अत्यधिक महत्व देते है। उनका यह विश्वास है कि इन भिन्नताओं का ज्ञान प्राप्त करके शिक्षक अपने छात्रों का सर्वाधिक हित कर सकता है। साथ ही शिक्षा के परम्परागत स्वरूप में क्रांतिकारी परिवर्तन करके उसे बालकों की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुकूल बना सकता है। औद्योगिक मनोविज्ञान, शिक्षा-मनोविज्ञान और बाल-मनोविज्ञान के क्षेत्रों में वैयक्तिक भिन्नताओं का महत्व सर्वाधिक है। कुछ प्रमुख महत्व इस प्रकार है-
  • व्यक्तियों के वर्गीकरण में वैयक्तिक भिन्नताओं का ज्ञान आवश्यक है। यह वर्गीकरण विद्यालय में विद्यार्थियों का हो सकता है। विद्यार्थियों का मानसिक योग्यताओं के आधार पर वर्गीकरण कर यदि उन्हें शिक्षा दी जाती है तो शिक्षा उनके लिए बहुत उपयोगी हो जाती है।
  • अध्ययनों में देखा गया है कि कक्षा में मानसिक दृष्टि से जितनी अधिक समजातीयता होगी, शिक्षा का प्रभाव उतना ही समान होगा।
  • कक्षा में वैयक्तिक भिन्नताओं के अनुसार शैक्षिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए आवश्यक है कि कक्षा में बालकों की संख्या अधिक से अधिक 20 होनी चाहिए। कक्षा में विद्यार्थियों की संख्या कम होने से शिक्षक का विद्यार्थियों से व्यक्तिगत सम्पर्क व सम्बन्ध अच्छा होता है तथा वह विद्यार्थियों से उनके स्वभाव के अनुसार कार्य करवा सकता है।
  • एक ही कक्षा के बालकों की रूचियों, अभिवृत्तियों एवं मानसिक योग्यताओं में अन्तर होने के कारण पाठ्यक्रम का विभिन्नीकरण अत्यन्त आवश्यक है। सबको अपनी रूचियों, योग्यताओं और इच्छाओं के अनुसार विषयों के चयन में छूट होनी चाहिए।
  • व्यक्तिगत भेदों के कारण सब बालकों में समान कार्य की समान मात्रा पूर्ण करने की क्षमता नहीं होती है। अतः गृह-कार्य देते समय बालकों की क्षमताओं और योग्यताओं का पूर्ण ध्यान रखना आवश्यक है।
  • (वैयक्तिक भिन्नताएँ )Individual Differences लिंग-भेद के कारण भी पाई जाती है जिससे बालक-बालिकाओं के रूचियों, क्षमताओं, योग्यताओं, आवश्यकताओं आदि में अन्तर होता है। जैसे-जैसे वह बड़े होते है, वैसे- वैसे अन्तर अधिक स्पष्ट होता है। अतः प्राथमिक कक्षाओं में उनके लिए समान पाठ्य-विषय हो सकते है परन्तु माध्यमिक कक्षाओं में इन विषयों में अन्तर की स्पष्ट रेखा का खींचा जाना आवश्यक है। शिक्षक और माता-पिता को इन अन्तरों को ध्यान में रखकर बालक-बालिकाओं को सिखाना या प्रशिक्षण देना चाहिए।
  • इसी प्रकार स्किनर महोदय के अनुसार उद्योग के क्षेत्र में भी कर्मचारियों के चयन में  व्यक्तिगत भिन्नता (Individual Difference) का अध्ययन आवश्यक है। इसी प्रकार कर्मचारियों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों एवं स्थानान्तरण के समय में भी  व्यक्तिगत भिन्नता (Individual Difference) का ज्ञान आवश्यक है।

निष्कर्ष-conclusion-

अतः सारांश रूप में बालकों की वैयक्तिक भिन्नताओं का शिक्षा में अति महत्वपूर्ण स्थान है। इन विभिन्नताओं का ज्ञान प्राप्त करके शिक्षक अपने छात्रों को विविध प्रकार से लाभ पहुँचा सकता है। बाल मनोविज्ञान के क्षेत्र में भी बालकों के व्यवहार को समझने में, उनके विकास के लिए उपयुक्त वातावरण प्रदान करने में वैयक्तिक भिन्नताओं का ज्ञान आवश्यक है।

1.3 शिक्षण को प्रभावित करने वाले कारक

1.4.2 शिक्षक केंद्रित शिक्षण विधियां


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