यह चर्चा मीडिया में चारों तरफ जोरों पर है कि अयोध्या में राम मंदिर बनने के क्या प्रभाव होंगे एक वर्ग राम मंदिर की चर्चा पर यह कहता है की राम मंदिर के स्थान पर यदि अस्पताल बनवा दिया गया होता तो उसे सभी का इलाज होता सभी का भला हो गया होता और उसी के विपरीत दूसरा पक्ष अब यह कहने लगा है कि बाबरी मस्जिद की जगह है जो दूसरी मस्जिद प्रस्तावित की गई है अब उसकी जगह है हम अस्पताल बना देते हैं क्योंकि राम मंदिर तो अब बन ही चुका है इस प्रकार की ट्विटर बड़ी और चर्चाएं इस विषय में जोरों पर है।

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हम इसे कुछ सैद्धांति को ऐतिहासिक स्वरूप में भी देखेंगे हम यह देखेंगे कि जब विदेशी आक्रमण भारत पर बहुत सफल नहीं हुए थे तब भारत में मंदिर और समाज और इसके अर्थव्यवस्था की क्या स्थिति थी। सबसे पहले हम देखते हैं कि भारतीय सामाजिक सांस्कृतिक व्यवस्था में जो भी धार्मिक समूह उसे समय विद्यमान थे मध्यकाल में जैसे ही जैन धर्म बौद्ध धर्म और सनातन हिंदू या वैदिक धर्म इन सभी धर्म के लोगों के उपासना स्थल प्राय हुआ ही करते थे उन्हें आप चाहे जैन मंदिर कहें चाहे बौद्ध मठ कहे चाहे हिंदू मंदिर आश्रम गुरुकुल आदि उनका नाम दें किंतु उन सब का उसे समय इतना प्रभाव था कि समग्र अखंड भारत वर्ष में धार्मिक तीर्थ यात्रा के रूप मेंसभी लोग इस महाद्वीप के उपमहाद्वीप के एक शोर से दूसरे छोर तक भ्रमण करते रहते थे ऐसा कहा जाता है कि श्रीमद् आद्य शंकराचार्य जी केवल 32 वर्ष की आयु तक उन्होंने जीवन धारण किया था किंतु इतने कम समय में उन्होंने इस पूरे भारतवर्ष की पांच बार परिक्रमा कर ली थी और उसके उपरांत अपने चार पत्त्या शिष्यों को आदेश दिया था और उन्होंने भारत में चार कोनों पर चार धामों की स्थापना कर दी थी।
यह घटना यह प्रदर्शित करती है कि भारत में धर्म संस्कृति अर्थव्यवस्था सामाजिकता और लोगों का परस्पर व्यवहार और उनकी धार्मिक मान्यताएं और धारणाएं किस प्रकार से एक दूसरे में गोली मिली है जहां पर धार्मिक संप्रदायों के नाम पर कभी भी ऐसी अशांति नहीं रही की एक शोर का व्यक्ति दूसरे छोर में जाने के लिए इस तरह से कभी चिंतित रहा हो या अधिक समय तक चिंतित रहा हो। भारत की जो भौगोलिक प्रकृति है इसका वह विद्या की एक और दो समुद्र है दूसरी ओर पर्वत है हिमालय जैसा और बीच में मध्य भाग में भूमि वाला भाग है एक तरफ बहुत ठंड बढ़ती है एक तरफ बहुत बरसात होती है एक तरफ गर्म प्रदेश है दक्षिण का और एक तरफ मरुस्थल है जहां पर बहुत ठंड भी पड़ती है और बहुत गर्मी भी होती है और इस प्रकार की विविधता में यहां का खान-पान यहां का रहन सहन यहां का पहनावा सब कुछ अत्यंत विद्या को धारण किए हुए हैं फिर भी यहां के लोग जब एक साथ एक परिवार की तरह आचरण करके एक स्थान से दूसरे स्थान पर यात्रा किया करते थे तो उसका एकमात्र आधार था कि उनके सांस्कृतिक मूल्यएक ही थे मैं यह नहीं कहता कि वह एक समान थे बल्कि यह कहता हूं कि वह एक ही थे यहां की मिली जुली संस्कृति में सभी का निवास था सभी आनंदपूर्वक हरसोला से अपना जीवन व्यतीत करते थे क्योंकि इस संस्कृति का मूल आधार आनंद है भारतवर्ष में जब ब्रह्म की अवधारणा के आधार पर ज्ञान का उल्लेख किया जाता है तो यह कहा जाता है कि ईश्वर सत्यानंद है सच्चिदानंद है अर्थात वह सत्य है वह चैतन्य है और वह आनंद स्वरूप है और वह ईश्वर सारी सृष्टि में कान-कान में निवास करता है और इसीलिए समग्र जड़ और चेतन जगत का स्वभाव आनंद स्वरूप है हमें यह पता होना चाहिए कि जैसे सुख का उल्टा दुख होता है इस प्रकार आनंद का विपरीत कोई भी शब्द नहीं है अर्थात हमारी संस्कृति आनंद प्रधान है और इसलिए यहां पर सच्ची शांति प्राप्त होती है।
Ayodhya ram mandir
इस प्रकार जब हमारे देश में मंदिरों देवालय्यों आश्रमों मतों का आधिक्य था तब हमारी अर्थव्यवस्था सामग्र भूमंडल की अर्थव्यवस्था के 35% थी इस प्रकार के आंकड़े अवर दिन ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी और अन्य अन्य स्रोतों से प्राप्त किया जा सकते हैं यह प्रदर्शित करता है कि भारतवर्ष उसे समय शांति ही शांति ही शांति ही को चरितार्थ करता था कि वह आदि दैविक आदि भौतिक और आध्यात्मिक तीनों तरह की शांति को स्वयं में धारण करता था।
Ram mandir
वर्तमान में यह भी खबर चल रही है और बहुत तीव्रता से चल रही है कि अयोध्या में मंदिर निर्माण के उपरांत अर्थव्यवस्था पर उसका क्या प्रभाव पड़ेगा तो विशेषज्ञों का कहना है की अर्थव्यवस्था पर उसका बहुत ही सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और उससे बहुत से व्यवसाय चल पड़ेंगे और जो एनआरआई हिंदू लोग विदेश में रहते हैं वह लाखों करोड़ों की संख्या में भारत में आते हैं और वह इस प्रकार से भारत की अर्थव्यवस्था को और अधिक बूस्ट प्रदान करेंगे इस प्रकार हम देखते हैं की अर्थव्यवस्था भी समृद्ध होगी दूसरी ओर भारतीय परंपराएं ही संसार में ऐसी हैं जो यह नहीं कहती कि हमारा ही ईश्वर बड़ा है वह कहती है कि हमारा ईश्वर वह सब का ईश्वर है हमारा ईश्वर जितना हमारा है वह संसार के सभी लोगों का उतना ही ईश्वर है वह आठवें आसमान पर नहीं रहता बल्कि वह समग्र कान-कान में व्याप्त है और वह सभी का कल्याण चाहता है वह केवल उसको मानने वालों का ही कल्याण नहीं चाहता इस प्रकार की जो मूलभूत विचारधारा है वह भारतवर्ष को एक सच्चा पंथनिरपेक्ष राष्ट्र बनती है वह अपने पथ का दुराग्रही अपने किसी भी नागरिक को बने नहीं देती और परिणामताह यह जो समुदाय है वह प्रसन्न भी रहता है वह विद्या भी धारण करता है और सबको अपने अंक में भरने के लिए सदा ही उत्सुकरहता है और सभी को स्वीकार करता है भारतवर्ष वह भूमि है जहां पर संसार के सभी धर्म के सताए हुए लोगों को शरण शांति समृद्धि जीवन और वृद्धि प्राप्त हुई है इस प्रकार अयोध्या में बनने वाले राम मंदिर से केवल किसी धार्मिक संप्रदाय को ही लाभ नहीं होने वाला है अपितु यह समग्र सृष्टि के लिए समग्र जड़ चेतन जगत के लिए आह्लाद उत्साह संतोष और शांति प्रदान करने वाला है।
अतः निश्चित ही इससे हमारी अर्थव्यवस्था बढ़ेगी इससे हमारा समुदाय की वैचारिकता स्वस्थ होगी इससे हमारे सांस्कृतिक मूल्यों का प्रभाव बढ़ेगा और इससे समग्र विश्व का कल्याण होगा क्योंकि हम ही हैं जो कहते हैं कि
सर्वे भवंतु सुखिन:
सर्वे संतु निरामया:
सर्वे भद्राणि पश्यंति
मां कश्चिद दुख भाग भवेत्।
हे ईश्वर! सभी सुखी रहे सभी निरोग रहे सबका कल्याण हो और कहीं भी किसी प्रकार का दुख ना हो।
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